शायरी की बात
1
जो बलवान था खुद की भुजाओं से
वह भी डूब गया इक दिन जीवन की सचाई मे |
2
वो जो शहंशाह थे अपने जमीर के
की बिक गये एक दिन ईमान के बाजार मे।
3
जंजीरों की जकड़न सा ,
ये समय का फितूर है कुछ ऐसा ,
की आजादी की ख्वाइश मे
अब दस्तूर नहीं है वैसा |
4
उम्र का तकीजा देख ग़ालिब ,
जवानी की कसरतें
बुढ़ापे की हसरतें
ना मंजूर हैं ,एक दूसरे को |
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