Friday, June 20, 2025

एकांत की दस्तक

  एकांत की दस्तक  


 वक़्त की इस दौड़ मे कहीं तो 

कुछ रुका हुआ है ,

जो सामने होते हुए 

भी नजरों से बचा हुआ है ,


पल की गहराई मे जो है  

 ओझल परतों के साये में , 

 तारों सा फासला कहीं तो।,

फिर भी मौजूद, हमारे हमसाये मे,


भागदौड़ की बेचैनी में 

सुकून का आखिरी शहर है वो। 

 मन की सीमाओं से परे 

एकांत का अंतिम पहर है वो ,


जिंदगी की धुप में वो 

छाँव है गुलजार की ,

घोर अँधेरी रात में  तड़प 

जैसे चाँद के इन्तजार की,


रेगिस्तान की तपती रेत में 

बारिश की पहली रात है वो ,

बसंत के यौवन में मदहोश 

फूलों की आपसी बात है वो ,

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