Monday, July 7, 2025

                                            उस सुकून की तलाश 

 

जिस सुकून की तलाश में तुम दिन रात भागते फिरते हो ना, यहाँ, वहाँ हर जगह ,वो कई बार आखिर में तब मिलता ,जब उम्मीद टूट जाती है और थक हार के साँसों की धीमी पड़ती रफ्तार में तुम्हारा मन शांत हो जाता है | तभी अचानक से कुछ ऐसा महसूस होगा जिस से बरसों की प्यास तृप्त हो जायेगी | धीरे-धीरे दिल दिमाग पर कुछ छा जायेगा ,जिसका एहसास पहली बार होगा तुम्हें और कहोगे, “हाँ, यही तो मैं ढूंढ रहा था कब से “ |

वो पल इतना धीमा होगा की वक्त ने जैसे उसे अपनी चाल से बाहर फेंक दिया हो | वो असीम मौन और शांति  तुम्हारे अंदर पहले से ही छिपी हुई थी , बस इंतजार में थी बेपरदा होने के |उसके बाहर आने का मुख्य कारण ये था की तुम अपने दिमाग से वो सब निकाल चुके थे, जो तुम नहीं थे | वो परत जिसके पीछे आनंद का खजाना था ,हट चुकी थी जब तुम हार मान के बैठ गये थे |

जो तुम नहीं थे, वो सब तुमने निकाल दिया ,जिस के बाद जो तुम हो वो बाहर आ गया | इसी एहसास की तलाश ही मादक सेवनों की लत लगाती है ,जिस से कुछ समय के लिए हमे ये सुकून मिल जाता है | इसके बाद हम सेवन  के आदि हो जाते हैं |   

पहाड़ों पर चलते-चलते जब कभी तुम्हारी साँसे बाहर आ जायें और तुम बैठ के, साँसों को जब आराम देते हो, तभी चीड़ देवदार के लंबे पेड़ों से चली हवा तुम्हारे कानों पर पड़ती है, और तुम सुनते हो एक सन्न सी आवाज,

जिसकी मौन गूंज में तुम खो जाते हो ,उसी पल वो सुकून का एहसास तुम्हें अपनी आगोश में ले लेता है |

बस इसी की तलाश है हमे ।

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